मंगलवार व्रत (Mangalwar Vrat)
हनुमानजी की पूजा विधि:-
सर्व सुख, ग्रह शांति व रक्त विकार, राज्य सम्मान तथा पुत्र की प्राप्ति हेतु मंगलवार का व्रत उतम है!
इस व्रत मे गेहू और गुड का ही भोजन करे!
भोजन दिन रात मे एक बार ही भोजन ग्रहण करना करे|
लगातार व्रत २१ हफ्तो तक रखे|
इस व्रत से मनुष्य के सभी दोष नष्ट हो जाते है यदि शुद्ध मन से विधि विधान से करे!
व्रत व पूजन के समय लाल पुष्पो को चडावे और लाल वस्त्र धरण करे!
अंत मे हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए और मंगलवार की कथा सुननी चाहिए!
हनुमानजी की पूजा के दौरान किस मंत्र को पढ़ते हुए क्या -क्या करना चाहिए
Hanumanji ki pooja ke dauran is
mantra ko padhte huye unse kshama-prarthana karna chahiye-
Mantraheenam
Kriyaheenam Bhaktiheenam Kapishwar |
Yatpoojitam
Maya Dev! Paripoorn Tadastu Me ||
हनुमानजी की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उनसे क्षमा-प्रार्थना करना चाहिए-
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं कपीश्वर |
यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे ||
Hanumanji ki
pooja me is mantra ko padhte huye Suvarnpushp samarpan karna chahiye-
Vaayuputra!
Namastubhyam Pushpam Sauvarnakam Priyam |
Poojayishyaami
Te Moordhni Navratn - Samujjalam ||
हनुमानजी की पूजा में इस मंत्र को पढ़ते हुए सुवर्णपुष्प समर्पण करना चाहिए-
वायुपुत्र! नमस्तुभ्यं पुष्पं सौवर्णकं प्रियम् |
पूजयिष्यामि ते मूर्ध्नि नवरत्न - समुज्जलम् ||
Hanumanji ki
pooja me is mantra ko padhte huye unhe Ritufal samarpan karna chahiye-
Falam
Naanaavidham Swaadu Pakvam Shuddham Sushobhitam |
Samarpitam
Mayaa Dev Grihyataam Kapinaayak ||
हनुमानजी की पूजा में इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें ऋतुफल समर्पण करना चाहिए-
फ़लं नानाविधं स्वादु पक्वं शुद्धं सुशोभितम् |
समर्पितं मया देव गृह्यतां कपिनायक ||
Is mantra ko
padhte huye Pavanputra Hanumanji ko sindoor samarpan karna chahiye-
Divyanaagasamudbhutam
Sarvmangalaarkam |
Tailaabhyamgayishyaami
Sindooram Grihyataam Prabho ||
इस मंत्र को पढ़ते हुए पवनपुत्र हनुमानजी को सिन्दूर समर्पण करना चाहिए-
दिव्यनागसमुद्भुतं सर्वमंगलारकम् |
तैलाभ्यंगयिष्यामि सिन्दूरं गृह्यतां प्रभो ||
Anjaneeputra
Hanuman ki pooja karte samay is mantra ke dwara unhe pushpmala samarpan karna
chahiye-
Neelotpalaih
Kokanadaih Kahlaaraih Kamalairapi |
Kumudaih
Pundareekaistvaam Poojayaami Kapeeshwar ||
अंजनीपुत्र हनुमान की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें पुष्पमाला समर्पण करना चाहिए-
नीलोत्पलैः कोकनदैः कह्लारैः कमलैरपि |
कुमुदैः पुण्डरीकैस्त्वां पूजयामि कपीश्वर ||
Hanumanji ki
pooja karte samay is mantra ke dwara unhe Panchamrit samarpan karna chahiye-
Madhvaajya -
Ksheer - Dadhibhih Sagudairmantrasanyutaih |
Panchamritaih
Prithak Snaanaih Sinchaami Tvaam Kapeeshwar ||
हनुमानजी की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें पंचामृत समर्पण करना चाहिए-
मध्वाज्य - क्षीर - दधिभिः सगुडैर्मन्त्रसन्युतैः |
पन्चामृतैः पृथक् स्नानैः सिन्चामि त्वां कपीश्वर ||
Marootinandan
ki pooja me is mantra ke dwara unhe arghya samarpan karna chahiye-
Kusuma-Kshta-Sammishram
Grihyataam Kapipungav |
Daasyaami Te
Anjaneeputra | Svamarghyam Ratnasanyutam ||
मारुतिनंदन की पूजा में इस मंत्र के द्वारा उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए-
कुसुमा-क्षत-सम्मिश्रं गृह्यतां कपिपुन्गव |
दास्यामि ते अन्जनीपुत्र | स्वमर्घ्यं रत्नसंयुतम् ||
Is mantra ko
padhte huye Anjaniputra Hanumanji ko padya samarpan karna chahiye-
Suvarnkalashaaneetam
Sushthu Vaasitamaadaraat |
Padyoh
Padyamanagham Pratifagrihna Praseed Me ||
इस मंत्र को पढ़ते हुए अंजनीपुत्र हनुमानजी को पाद्य समर्पण करना चाहिए-
सुवर्णकलशानीतं सुष्ठु वासितमादरात् |
पाद्योः पाद्यमनघं प्रतिफ़गृह्ण प्रसीद मे ||
Hanumanji ki
pooja ke dauran is mantra ko padhte huye unhe aasan samarpan karna chahiye-
Navratnmayam
Divyam Chaturstramanuttamam |
Sauvarnamaasanam
Tubhyam Kalpaye Kapinaayak ||
हनुमानजी की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए-
नवरत्नमयं दिव्यं चतुरस्त्रमनुत्तमम् |
सौवर्णमासनं तुभ्यं कल्पये कपिनायक ||
Is mantra ko
padhte huye Pavanputra Hanumanji ka aavahan karna chahiye-
Shriramcharanaambhoj-Yugal-Sthiramaanasam
|
Aavaahayaami
Vardam Hanumantambheeshtadam ||
इस मंत्र को पढ़ते हुए पवनपुत्र हनुमानजी का आवाहन करना चाहिए-
श्रीरामचरणाम्भोज-युगल-स्थिरमानसम् |
आवाहयामि वरदं हनुमन्तमभीष्टदम् ||
हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa )
॥दोहा॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥
॥चौपाई॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥
कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥
सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥
लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥
रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥
सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥
तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥
सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥
आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥
सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥
चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥
साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥
राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥
तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥
और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥
॥दोहा॥
पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥
संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankat Mochan Hanuman Aashtak )
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों I
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात
न टारो I
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो I को - १
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो I
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो I
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो I
को - २
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो I
जीवत ना बचिहौ हम सो
जु ,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो I
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब ,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो I
को - ३
रावण त्रास दई सिय को सब ,
राक्षसी सों कही सोक निवारो I
ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,
जाए महा रजनीचर मरो I
चाहत सीय असोक सों आगि सु ,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो I
को - ४
बान लाग्यो उर लछिमन के तब ,
प्राण तजे सूत रावन मारो I
लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो I
आनि सजीवन हाथ
दिए तब ,
लछिमन के तुम प्रान उबारो I को - ५
रावन जुध अजान कियो तब ,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो I
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल ,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु ,
बंधन काटि सुत्रास निवारो I
को - ६
बंधू समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो I
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि ,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो I
जाये सहाए भयो तब ही ,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो I को - ७
काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो I
कौन सो संकट मोर गरीब को ,
जो तुमसे नहिं जात है टारो I
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,
जो कछु संकट होए हमारो I
को - ८
दोहा
लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर I
वज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर II
Baala samai ravi bhaksha liyo, Taba
teenahu loka bhayo andhiyaaro
Taahi so traasa bhayo jaga-ko, Yaha
sankata kaahu so jaata na taaro
Dewan-aani kari binatee, Taba chaari
diyo ravi kashta niwaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may, kapi
sankat mochan naam tihaaro
Baali ki traasa kapeesa basai giri
jaata mahaa prabhu pantha nihaaro
Chownkee maha muni sraapa diyo, taba
chaahiyay kowna bichaar bichaaro
Lai dwija roopa liwaaya mahaa, prabhu
so tuma daasa kay shoka niwaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may kapi
sankat mochan naam tihaaro
Angad kay sanga layna gayay, siya
khoja kapisha yaha baina uchaaro
Jeewata-na bachihow hum-so, jubina
sudhi laayi-ihaa paga dhaaro
Hayri thaki tatta sindhu sabai, taba
laayi siyaa sudhi praana ubaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may kapi
sankat mochan naam tihaaro
Rawana traasa-dayi siya ko, saba
raakshashi so kahi shoka nivaaro
Taahi samaya hanumana mahaa prabhu,
jaaya mahaaraj nicharamaaro
Chaahita-siya ashoka so-aagi, soo-dai
prabhu mudrika soka niwaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may kapi
sankat mochan naam tihaaro
Baanlagyo ura Laksmana kay, taba
praana tajay suta rawana maaro
Lai-graha vaidya sushen sameta,
tabahi giri drona su beera ubaaro
Aani sanjeewana haatha dayay, taba
lakshkmana kay tuma praana ubaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may kapi
sankat mochan naam tihaaro
Rawana juddha ajaana kiyo, taba naaga
ki phaasa sabai sira daaro
Sri Raghunatha sameta sabai,
dala-moha bhayo yaha sankat bhaaro
Aani khagesha tabai hanumana-ju,
bandhana kaati sutraasa niwaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may kapi
sankat mochan naam tihaaro
Bandhu sameta jabai–ahirawana, lay
raghunatha pataala sidhaaro
Devihi puji bhali vidhi, so-bali
daywu sabai mili mantra vichaaro
Jaayi sahaayi bhayo tabahi,
ahi-rawana sainya samet sanghaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may kapi
sankat mochan naam tihaaro
Kaaja kiyay bara daywana kay, tuma
beera mahaa prabhu dekhi bichaaro
Kowna so sankata mora gariba, ko-jo
tuuma so nahin jaata hai taaro
Baygi haro hanumana maha prabhu,
so-kachu sankat hoya hamaaro
Ko nahi jaanata hai jaga may kapi
sankat mochan naam tihaaro
Doha:
Laal Deha Laalee Lasay, Aru Dhari
Laala Langoora I
Bajra Deha Daanawa Dalana, Jai Jai
Jai kapi Soora II
आरती हनुमान लला की आरती -
आरती हनुमान लला की आरती -
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